कोई बड़ा था, कोई छोटा
खेल रहे थे खेल
क्रीडा का आख्यान
धर्म ग्रंथ नहीं देखा?
जो न्याय हैै
वही अन्याय है
जो अन्याय है
वही न्याय है।
जांच को आंच नहीं
आंच को सांच नहीं
फिर कैसा न्याय
कैसा अन्याय
जो जांच है वही सांच हैं।
दिनेश महेश हो सकता है
दिलीप गणेश
सौरभ सुमन हो सकता है।
होने का कुछ भी हो सकता है
शर्त है कि उसकी हैसियत क्या है
यही तो न्याय दंड का तकाजा है।
तिवारी जी फंस गये
पटना में होते तो
तिवारी तिवारी नहीं होते।
इतवारी हो जाते
चार सौ साल पहले
था इस नाम का एक आदमी
वो अब नहीं है।
फिर कैसा दुष्कर्म
कैसा गैंग रेप
कैसा व्यभिचार?
जो अब है वो कल नहीं
जो कल है वो परसो नहीं
जो जांच है वो जांच नहीं
आंख में धूल है, धूल में आंख नहीं।
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पटना में सामूहिक दुष्कर्म के मामले में पुलिस के खुलासे पर।
*Ajay Kumar, Former resident editor, Hindustan & Prabhat Khabar